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माता का ऐसा चमत्कारी मंदिर, जिसके सामने औरंगजेब को भी घुटने टेकने पड़े थे

भारत भर में देवी मां के कई चमत्कारी और अद्भुत मंदिर हैं जिनमें उन्हें तरह-तरह के चढ़ावे और प्रसाद चढ़ाए जाते हैं। कहीं देवी मंदिर में बलि चढ़ाकर उन्हें प्रसन्न किया जाता है तो कहीं केवल फूल और मिठाई ही चढ़ाई जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यहां देवी का एक ऐसा चमत्कारी मंदिर भी है जहां उन्हें शराब चढ़ाई जाती है। इस मंदिर में मां अम्बे के दर्शन के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। यह मंदिर राजस्थान के सीकर जिले के घनघू गांव में स्थित है। राजस्थान का यह प्रसिद्ध मंदिर जीना माता मंदिर लोगों की आस्था का मुख्य केंद्र है। लोगों का मानना ​​है कि यहां मां से मांगी गई मन्नत जरूर पूरी होती है। यहां साल भर भक्तों की लाइने लगी रहती है, लेकिन नवरात्र के दिनों में यहां भक्तों की संख्या ज्यादा रहती है, मंदिर परिसर में नौ दिनों तक मेला भी लगता है, जिसमें काफी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

मंदिर एक हजार साल से भी ज्यादा पुराना है

जीण माता के मंदिर के बारे में कोई प्रमाणित जानकारी तो नहीं मिलती, जिसमें इसकी सटीक जानकारी मिलती हो, लेकिन फिर भी अनुमान लगाया जाता है कि यह मंदिर लगभग 1000 साल पुराना है। जीना माता का वास्तविक नाम जयंती माता है। कहा जाता है कि जीण मां दुर्गा का अवतार हैं। घने जंगल से घिरा यह मंदिर तीन छोटे पहाड़ों के संगम पर स्थित है। इस मंदिर में विशाल संगमरमर का शिवलिंग और नंदी की मूर्ति आकर्षक है।

औरंगजेब को भी अपनी माँ के सामने घुटने टेकने पड़े

कहा जाता है कि औरंगजेब ने जीण माता के इस मंदिर को गिराने के लिए सैनिक भेजे थे। देवी की महिमा अपार है। उन्होंने मधुमक्खियों के रूप में आकर मंदिर की रक्षा की। ऐसा होते देख गांव वालों की मां के प्रति श्रद्धा और बढ़ गई और औरंगजेब अपने काम में असफल हो गया। एक बार जब औरंगजेब बीमार पड़ा तो उसे उसी समय अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने जीण माता के मंदिर में हर महीने डेढ़ मन तेल चढ़ाने का वादा किया। जब उसने माफी मांगी तो मां ने उसे माफ कर दिया। उसी दिन से मुगल बादशाह की मां के प्रति श्रद्धा बढ़ गई, बाहर से भी लोग इस मंदिर में जीण माता के दर्शन करने आते हैं। नवरात्रि में यहां नौ दिनों तक मेला लगता है और लोग बड़ी धूमधाम से मां की पूजा करते हैं।

जीण माता मंदिर की कहानी

जीण माता का जन्म घांघू गांव के चौहान वंश के राजा घनघ के घर हुआ था। जीण का एक बड़ा भाई हर्ष था, दोनों भाई बहनों में बहुत प्यार था। लोग जिना को देवी और हर्ष को शिव का रूप मानते थे। कहा जाता है कि एक दिन जीण माता  जी अपनी भाभी के साथ झील से पानी लाने गई थी। वहां जीण और उसकी भाभी में इस बात को लेकर बहस हो गई कि हर्ष किसे सबसे ज्यादा प्यार करता है। उन्होंने एक शर्त रखी कि हर्ष उसी से प्रेम करता है जिसकी मटकी पहले उसके सिर से उतार कर नीचे रख दी जाएगी। तभी दोनों लोग लेकर हर्ष के सामने पहुंचे, सबसे पहले हर्ष ने अपनी पत्नी के बर्तन उतारे और शर्त हार गया। उसके बाद जीण माता को क्रोध आया और वे अरावली पर्वत की चोटी पर भगवती के लिए तपस्या करने लगे और जब हर्ष उन्हें मनाने गए तो जिन तपस्या में लीन थे। उसके बाद हर्ष भी भगवान भैरव की तपस्या करने लगा और फिर दोनों जीणमाता धाम और हर्षनाथ भैरव के नाम से प्रसिद्ध हुए।

Official Website: https://jeenmata.org/

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