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#Kabir daas Jayanti 2021 | #कबीर दास के दोहे | #कबीर दास जी का जीवन परिचय | #कबीर के दोहे कक्षा 12 | #कबीर के दोहे अमृतवाणी |#कबीर साहेब के दोहे | #कबीर के दोहे साखी

Kabir daas Jayanti 2021 कबीर दास जयंती विशेष 2021: कबीर दास के इन दोहों को रट लो सफलता आपके कदम चूमेगी

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कबीर के दोहे आपको बेहतर और अच्छा इंशान बनने के गुर सिखाते हैं


ज्येष्ठ मास (जून का महीना) की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि (तारीख) को कबीर दास जयंती मनाई जाती है। इस बार उनकी जयंती 24 जून 2021 को है। संत कबीर दास जी का जन्म सन् 1938 में माना जाता है। कबीर दास जी के जन्म के समय हर तरफ सर्वत्र (सभी तरफ) धार्मिक कर्मकांड यानि की धार्मिक कार्यो और पाखंड (झूठ, धोखादड़ी) का बोलबाला था। कबीर दास जी ने पाखंड के खिलाफ अपनी आवाज उठाई और लोगों में भक्ति भावना का बीज बोया यानि की लोगो को भगवान की पूजा के प्रति जागरूक किया। संत कबीर दास जी के दोहों ने हमेशा उन्नति का मार्ग ही खोला है और समाज को बेहतर बनाने के लिए सही ज्ञान दिया है। संत कबीर दास जी ने सालो पहले लाइफ मैनेजमेंट के जो नियम अपने दोहों के जरिए बताए है, वो आज के दौर (समय) में भी उतने ही कारगर हैं, जितने की उस वक्त थे। अगर हम संत कबीर दास जी के इन दोहों को अपनी पर्सनल और प्रफेशनल लाइफ में उतारें तो सफलता आपके कदम जरूर चूमेगी। आइए देखते है की कबीरदास की ज्ञान की गागरी के दोहे आपकी जिंदगी को कैसे प्रेरित करते हैं.

👉👉इस दोहे से मिलेगा आपको अपने जीवन का लक्ष्य

तिनका कबहुं ना निन्दिये, जो पांवन तर होय,

कबहुं उड़ी आंखिन पड़े, तो पीर घनेरी होय।

भावार्थ: संत कबीर दास जी इस दोहे में कहते हैं कि किसी को छोटा, निर्बल या कमजोर समझ कर उसकी कभी भी निंदा नहीं करनी चाहिए। समय बदल जाने पर यह आपके लिए बहुत ही नुकसानदायक साबित हो सकता है। जैसे को अगर पैर के नीचे दबा हुआ छोटा-सा तिनका भी अगर आपकी आंख में गिर जाए तो बड़े से बड़े इंशान की हालत खराब कर देता है। अगर आज के समय के अनुसार इस दोहे को समझें तो हमे कभी भी अपने जूनियर्स (हमसे छोटे या हमसे छोटी नौकरी वाले) या काम करने वाले व्यक्ति को कभी भी नीचा नहीं समझना चाहिए या कभी नीचा दिखने की कोशिश नही करनी चाहिए, अगर हम उनके साथ भी अच्छे से व्यवहार करेंगे तो वो आपकी मदद करेंगे और जिस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए संगठित रूप (साथ मिलकर) से काम कर रहे हैं तो वे उसमें भी आपकी मदद करेंगे। साथ मिलकर काम करने से आपको सफलता बहुत जल्दी मिल जाएगी और प्रतेक काम आसान होगा।


👉👉अगर आपके पास ऐसे ज्ञान है तो उसका कोई मतलब नहीं है

पढ़े गुनै सीखै सुनै मिटी न संसै सूल,

कहै कबीर कासों कहूं ये ही दुःख का मूल।

भावार्थ: संत कबीर दास जी कहते हैं कि बहुत सी पुस्तकों को पढ़ा-सुना और सीखा लेकिन फिर भी मन में गड़ा संशय यानि की संका, छल-कपट और बदले की भावना का कांटा नही निकला तो फिर ऐसे पढ़ने-लिखने का क्या फायदा, जो मन से संशय न मिटा सके। अगर आज के समय के अनुसार इस दोहे का मतलब देखा जाए तो  भी आपको वही पहले वाला ही परिणाम मिलेगा। चाहे आप ज्ञान के लिए कितनी भी पुस्तकें पढ़ लें, अगर वो आपके मन का संशय दूर न कर सके तो उन किताबों का पढ़ने का कोई फायदा नहीं है। वैसे आप कुछ भी और कोई भी किताब  पढ़ लो लेकिन अगर आपको उसका मतलब ही समझ में न आए तो फिर वो किताब पढ़ने का क्या फाइदा। इसलिए अगर आप हर चीज को समझकर पढ़ेंगे तो भविष्य में लाभ भी आएगा।

👉👉इस तरह मिलती है सफलता

धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय,

माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय।

भावार्थ: संत कबीर दास जी कहते हैं कि हर काम के परिणाम के लिए हमे धैर्य रखना चाहिए। कर्म (काम) करने के बाद हमारे लिए ज्यादा उतावला पन सही नहीं रहता है। जैसे की एक माली अगर पेड़ को सौ या उससे भी ज्यादा घड़े पानी एक साथ दे भी दे, तब भी उस पेड़ पर फल, फल का मौसम आने पर ही लगते है। अगर आज के समय के अनुसार देखा जाए तो अगर आप किसी बड़े लक्ष्य को हासिल करना चाहते हैं तो उसके लिए सबसे पहले तो यह जरूरी है की आप अधीरता का त्याग कर दे। ऐसा कभी नहीं होता है की आज आपने किसी बड़े काम करने का लक्ष्य किया है और आज ही आपको सब कुछ मिल जाए। आपको अपना मन स्थिर करके लगातार प्रयास करना होगा। चीजें या हर काम तभी सफल होगा, जब उसका सही समय आएगा। ऐसा नहीं की आपकी कंपनी ने आपको कोई भी लक्ष्य दे दिया है तो उसे आपने एक दिन में पूरा कर दिया और बाकी दिन बैठे रहें, ऐसा कभी भी नहीं करना चाहिए। आपको प्रतिदिन (लगातार) प्रयास करना होगा और अपने काम में बेहतरी लानी होगी।

👉👉जीवन में कभी असफल नहीं होंगे दुखी

कबीर हमारा कोई नहीं, हम काहू के नाहिं,

पारै पहुंचे नाव ज्यौ, मीलके बिछुरी जाह।

भावार्थ: कबीर ने इस दुनिया को एक नाव बताया है और इस संसार रूपी नाव में हमारा कोई नहीं है और न ही हम किसी के हैं। ज्यों ही नाव किनारे पर पहुंचेगी तो हम सब बिछड़ जाएंगे। आज के संदर्भ में देखा जाए तो इस संसार रूप नाव में हमारा कोई नहीं है और न ही हम किसी के हैं। कोई भी इस संसार में सदा एक साथ नहीं रह सकता है। एक न एक दिन हर किसी को अलग होना ही पड़ता है। इसलिए कोई चीज आपसे छूट जाए तो उसका दुख न मना कर आगे बढ़ना चाहिए और अपने कर्म करना चाहिए।

👉👉भविष्य में जरूर मिलता है लाभ

दोस पराए देखि करि, चला हसन्त हसन्त,

अपने याद न आवई, जिनका आदि न अंत।

भावार्थ: दूसरों की कमियां देखकर हंसना सभी को आता है। ऐसा करने वाले यह भूल जाते हैं कि आपके अंदर भी कई कमियां हैं। ऐसी कमियां जिसका कोई अंत नजर नहीं आता। आज के संदर्भ में देखा जाए तो कार्यस्थल पर कभी भी कॉलीग्स की कमियों को देखकर हंसना नहीं चाहिए क्योंकि आपको भी किसी पूरा ज्ञान नहीं होगा। इसलिए अपने साथ काम करने वालों को अगर कोई चीज नहीं आ रही है तो आप उसको बता दें न कि उस पर हंसे। ऐसा करने से अगर कोई चीज आप पर नहीं आती तो कॉलीग्स आपकी मदद करेगा, जिसका लाभ आपको भविष्य में जरूर मिलेगा। क्योंकि हर ज्ञान का कभी न कभी लाभ जरूर मिलता है। इसलिए दूसरों की कमियों को गिनाना छोड़कर खुद पर ध्यान देना चाहिए कि आप उस चीज को कितनी बेहतरी से कर सकते हैं।

👉😢इससे ज्यादा दुखद कुछ नहीं

रात गंवाई सोय कर दिवस गंवायो खाय,

हीरा जनम अमोल था कौड़ी बदले जाय।

अर्थात: संत कबीर दास जी कहते हैं रात सोकर बिता दी और दिन खाकर बिता दिया तो ऐसे जीवन का कोई मूल्य नहीं है। हीरे के समान कीमती जीवन को संसार के निर्मूल्य (जिसका कोई मूल्य नही है ) विषयों की कामनाओं और वासनाओं की भेंट चढ़ा दिया। इससे ज्यादा दुखद एक इंसान के लिए क्या हो सकता है। आज के संदर्भ में देखा जाए तो संत कबीर दास जी कहते हैं इंसान को प्रतिदिन मेहनत करते रहना चाहिए, चाहे फिर वह कितनी ही बार असफल क्यों न हुआ हो। क्योंकि ऐसा करने से आपका ज्ञान बढ़ता है। अगर हम इसी तरह से दिन भर खाते रहेंगे और रात में सो जाएंगे और पूरे दिन कुछ भी काम नहीं करेंगे तो ऐसे जीवन का कोई भी मतलब नहीं है। सफलता उसी इंशान को मिलती है, जो इंशान लगातार मेहनत करते रहते हैं और अपना सब कुछ त्याग भी देते हैं। क्योंकि यह अनमोल जीवन आपको मिला है तो उसका पूरा लाभ उठाए न कि दिनभर कुछ न करके, केवल यही सोचते रहें कि कैसे सफलता मिलेगी। केवल मेहनत करने वाले लोगो को ही सफलता प्राप्त होती है और इससे वो अपना ही नही बल्कि अपने पूरे परिवार का नाम ऊंचा करता है।

👉😎इस तरह बन जाते हैं बिगड़े हुए काम

ऐसी बानी बोलिये, मन का आपा खोय,

औरन को सीतल करे आपहुं सीतल होय।

भावार्थ: संत कबीर दास जी हमारे मुख से निकलने वाली बातों को ज्यादा महत्व देते हैं और कहते हैं कि हमे ऐसी वाणी बोलनी चाहिए, जिसको सुनकर दूसरों को भी प्रसन्नता हो और खुद भी प्रसन्नता महसूस करें। हमको ऐसी बात करनी चाहिए, जिससे दूसरों को कभी भी बुरा ना लगे और खुद के मन को भी ठेस न पहुंचे। आज के समय मे मीठी वाणी औषधि के समान है क्योंकि तलवार से लगी हुई चोट कभी न कभी तो भर जाती है लेकिन कडवे वचन बोलने से हुआ घाव कभी नहीं भरता है। अगर आप हर किसी से अच्छा बोलेंगे तो लोग आपके मित्र बनेंगे और मुश्किल वक्त में सब आपका साथ देंगे। क्योंकि मीठे वचन बोलने से बिगड़े काम भी बन जाते हैं। अगर आप दूसरों से सही से नहीं बात करेंगे तो आपके कई दुश्मन बन सकते हैं, जो आपको चोट पहुंचाने का काम कर सकते हैं।

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