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18 को शिवरात्रि और शनि प्रदोष का संयोग: इस शनिवार को शिव पूजन और व्रत करने से शनि के अशुभ प्रभाव से मिलेगी मुक्ति

18 फरवरी, शनिवार को फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी और चतुर्दशी तिथि रहेगी। यानी शनि प्रदोष और शिवरात्रि का संयोग बन रहा है। जिससे इस दिन व्रत करने और शिव की पूजा करने से शनि के अशुभ प्रभाव से मुक्ति मिलती है।

प्रदोष और शिवरात्रि का संयोग होने से पूरे दिन शिव पूजा की जा सकती है। इस शुभ योग में भगवान शिव और शनि की पूजा और व्रत करने से हर मनोकामना पूरी होती है। सभी प्रकार के पाप भी समाप्त हो जाते हैं। यह साल का पहला शनि प्रदोष है। इसके बाद 4 मार्च और 1 जुलाई को शनि प्रदोष का योग बनेगा।


प्रदोष व्रत और पूजा विधि

व्रती को चाहिए कि वह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने के बाद भगवान शिव की पूजा और ध्यान करके व्रत की शुरुआत करे. त्रयोदशी यानी प्रदोष व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। यह निर्जल व्रत है। प्रातः काल गंगाजल, बिल्वपत्र, अक्षत, धूप और दीप से भगवान शिव का पूजन करें। शाम को पुन: स्नान करके सफेद वस्त्र धारण कर इसी तरह भगवान शिव की पूजा करें। शाम को भगवान शिव की पूजा करने के बाद आप जल पी सकते हैं।

शनि प्रदोष विशेष है

भगवान शिव शनिदेव के गुरु हैं। इसलिए शनि से संबंधित दोषों को दूर करने और शनि देव की शांति के लिए शनि प्रदोष व्रत रखा जाता है। संतान प्राप्ति की कामना के लिए शनि त्रयोदशी का व्रत विशेष रूप से शुभ माना जाता है। यह व्रत शनि के कोप, शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के प्रभाव को कम करता है।

शनिवार को पड़ने वाला प्रदोष सभी ऐश्वर्य और सभी दुखों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है। इस दिन दशरथ कृत शनि स्त्रोत का पाठ करने से जीवन में शनि के दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है। इसके अलावा शनि चालीसा और शिव चालीसा का पाठ भी करना चाहिए।

प्रदोष व्रत का महत्व

जब संध्या समय सूर्य अस्त होता है और रात्रि अस्त होती है, उस समय को प्रदोष काल कहते हैं। मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव शिवलिंग के रूप में प्रकट होते हैं और इसीलिए इस समय शिव का स्मरण कर उनकी पूजा करने से उत्तम फल मिलता है।

प्रदोष व्रत करने से चंद्रमा के अशुभ प्रभाव और दोषों से मुक्ति मिलती है। अर्थात शरीर के चंद्र तत्व में सुधार होता है। चंद्रमा मन का स्वामी है इसलिए चंद्र दोष दूर होने से मानसिक शांति और प्रसन्नता मिलती है। शरीर का अधिकांश भाग जल है अत: चन्द्र के प्रभाव से स्वास्थ्य अच्छा रहता है। शनि प्रदोष के दिन शनिदेव की पूजा भी करनी चाहिए।

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