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हवाई जहाज का माइलेज कितना होता है और इसका ईंधन क्यों खास होता है?

पिछले एक साल में कच्चे तेल के बाजार में काफी तेजी देखने को मिली है. रूस यूक्रेन युद्ध इसका सबसे बड़ा कारण था। लेकिन इससे दुनिया के लगभग सभी देशों ने ऊर्जा के मामले में बाहरी स्रोतों पर निर्भरता के खतरे को पहचाना है और जीवाश्म ईंधन के विकल्प पर तेजी से काम करना शुरू कर दिया है। आलम यह है कि अब दुनिया के देश अक्षय ऊर्जा में तेजी से निवेश कर रहे हैं ताकि वे इसके बाजार का दोहन करने में आगे हो सकें। लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि जीवाश्म ईंधन खत्म हो जाएगा? इस सवाल के जवाब में एक अहम पहलू है हवाई जहाज में इस्तेमाल होने वाला ईंधन और उसकी खपत। आइए जानते हैं कि हवाई जहाज में कितना ईंधन खर्च होता है और उनका माइलेज (हवाई जहाज का माइलेज) क्या है।

बोइंग विमान की खपत कितनी है

बोइंग विमान विमानों की दुनिया के सबसे बड़े विमानों में से एक माना जाता है और दुनिया में इसकी संख्या भी कम नहीं है। विश्व के उड्डयन उद्योग में भी इसकी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। एक बोइंग 747 विमान सिर्फ एक सेकंड की उड़ान में करीब एक गैलन यानी चार लीटर ईंधन की खपत करता है।

किलोमीटर और खपत

बोइंग 747 विमान प्रति मील लगभग 5 गैलन ईंधन की खपत करता है, जो लगभग 12 लीटर प्रति किलोमीटर है। ऐसे विमान एक लीटर ईंधन में करीब 0.8 किमी की दूरी तय करते हैं या एक किलोमीटर के सफर में करीब 12 लीटर ईंधन की खपत करते हैं। बोइंग का एक विमान प्रति घंटे 14400 लीटर ईंधन की खपत करता है।

विभिन्न प्रकार की यात्रा

बोइंग 747 विमान टोक्यो और न्यूयॉर्क शहर के बीच 13 घंटे की उड़ान में लगभग 187,200 लीटर ईंधन की खपत करता है, जिसमें 568 लोग सवार हो सकते हैं। इस विमान की औसत रफ्तार करीब 900 किलोमीटर प्रति घंटा है। जेट ए या जेटीए-1 प्रकार का जेट ईंधन एक केरोसिन आधारित ईंधन है जिसका उपयोग टर्बाइन इंजन वाले विमानों में किया जाता है।

बड़ी लेकिन महंगी यात्रा

वहीं, अलग-अलग देशों में विमानों का ईंधन भी अलग-अलग होता है। लेकिन सच्चाई यह है कि हवाई यात्रा न केवल महंगी होती है और इसीलिए यात्री संख्या बढ़ाने के लिए एयरलाइंस इतनी मेहनत करती है। जबकि यात्रा की लागत यात्री किराया और सामान परिवहन से प्राप्त होती है।

जीवाश्म ईंधन में कितना

आज, विमानन उद्योग दुनिया के जीवाश्म ईंधन का 2 से 3 प्रतिशत उपयोग करता है, जो सुनने में छोटा लग सकता है लेकिन मात्रा में छोटा नहीं है। इसमें से 80 फीसदी ईंधन कमर्शियल फ्लाइट्स में खर्च होता है। अभी दुनिया भले ही इलेक्ट्रिक वाहनों पर खर्च कर रही हो, लेकिन उड्डयन में वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की भी जांच की जा रही है।

अधिक ऊर्जा की जरूरत है

उड़ने वाले विमानों को बहुत अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। ऐसे में उनकी उड़ानों के लिए बेहद ताकतवर बैटरी की जरूरत होगी। ये हवा में उड़ते हैं, इसलिए इन्हें रेलवे की तरह बिजली के तारों पर नहीं चलाया जा सकता। पवन ऊर्जा उनके लिए उपयोगी नहीं है, इसके अलावा सौर ऊर्जा का उपयोग करने पर काफी बैटरी खर्च होगी।

वर्तमान में उड़ान में खर्च होने वाली ऊर्जा के अलावा विमान के बाकी कार्यों को बैटरी पर लाने का प्रयास किया जा रहा है। चुनौती विमानों के लिए वैकल्पिक इंजन खोजने की होगी, लेकिन फिलहाल दुनिया का ध्यान उन कारों पर है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा जीवाश्म ईंधन की खपत करती हैं। दूसरी ओर, हवाई जहाज के मामले में, हरित ऊर्जा के लिए हाइड्रोजन ऊर्जा ही एकमात्र विकल्प प्रतीत होता है।

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