मासिक शिवरात्रि 2022: मासिक शिवरात्रि व्रत हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। शिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा करने का विधान है। मासिक का अर्थ है 'महा या महीना' और शिवरात्रि का अर्थ है 'भगवान शिव की रात'। इस दिन रत्रि प्रहर की पूजा का विशेष महत्व है। वैसे तो फाल्गुन मास की शिवरात्रि को एक वर्ष में महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है, लेकिन हर महीने पड़ने वाली शिवरात्रि का भी विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन भगवान शिव का उपवास, पूजा और अभिषेक करना बहुत शुभ माना जाता है। यह एक धार्मिक मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत करने से भगवान शिव की कृपा मिलती है और भोलेनाथ के आशीर्वाद से असंभव और कठिन कार्यों को पूरा किया जा सकता है। साथ ही मासिक शिवरात्रि का व्रत करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। तो आइए आज जानते हैं वैशाख मास की शिवरात्रि का शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजन विधि।
वैशाख मास की शिवरात्रि तिथि
वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 28 अप्रैल गुरुवार दोपहर 12 बजकर 26 मिनट से शुरू हो रही है. वहीं यह तिथि 29 अप्रैल की देर रात 12 बजकर 57 मिनट पर समाप्त हो रही है. ऐसे में उदय तिथि के आधार पर शुक्रवार 29 अप्रैल को वैशाख मास की शिवरात्रि का व्रत रखा जाएगा.
वैशाख मास की शिवरात्रि का शुभ मुहूर्त
वैसे तो शिवरात्रि का पूरा दिन शुभ होता है, लेकिन इस दिन रात्रि प्रहर की पूजा का शुभ मुहूर्त 29 अप्रैल की रात 11:57 से 12:40 तक है. यदि आप किसी विशेष मनोकामना की पूर्ति के लिए शिवरात्रि की पूजा करना चाहते हैं तो इस मुहूर्त में कर सकते हैं।
शिवरात्रि का महत्व
शिवरात्रि शिव की प्रिय तिथि है। इस दिन पूजा और व्रत करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों के सभी कष्ट दूर करते हैं।
मान्यता के अनुसार शिवरात्रि के दिन व्रत करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और सकारात्मकता का संचार होता है। समस्याओं से मुक्ति पाने के लिए शिवरात्रि के दिन शिवलिंग का रुद्राभिषेक करना बहुत शुभ माना जाता है। साथ ही इस दिन शिव मंत्रों का जाप भी बहुत लाभकारी होता है।
मासिक शिवरात्रि पूजा विधि
मासिक शिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर स्नान करें। अगर आप इस समय मंदिर नहीं जा सकते हैं तो घर पर ही रहकर पूजा करें। सबसे पहले पूजा स्थल पर शिव जी के सामने दीपक जलाएं। घर में शिवलिंग हो तो दूध और गंगाजल आदि से अभिषेक करें। शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा आदि अवश्य चढ़ाएं। इस दिन भगवान शिव के साथ माता पार्वती की भी पूजा करनी चाहिए। पूजा करते समय नमः शिवाय मंत्र का जाप करते रहें। भगवान शिव को भोग लगाएं और आरती करें।
Reference Website: amarujala.com

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