जाने माता पार्वती का उग्र रूप कौन सा है | माँ धूमवाती जयंती | Dhumavati Jayanti 2021 | Dhumavati Jayanti | Dhumavati Jayanti Puja Vidhi | Dhumavati Jayanti Importance
Dhumavati Jayanti 2021: धूमावती जयंती कब ? सर्पदोष, गरीबी और कर्ज से मुक्ति पाने के लिए करें इन चीजों से हवन जल्दी ही आपको मिलेगा इन सभी से छुटकारा।
Dhumavati Jayanti 2021: माता पार्वती के
उग्र (भयानक) रूप को ही मां धूमावती है. इनके अवतरण तिथि यानि की जिस दिन माँ पार्वती ने यह रूप लिया था, को ही धूमावती जयंती मनाई जाती है. हिन्दी पंचांग के
अनुसार माँ धूमावती का अवतरण (अवतार) ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को
ही हुआ था. इस साल 2021 मे यह तिथि 18
जून
को होगी. इसलिए 10 जून की ही माँ धूमावती
जयंती और अष्टमी वर्त भी है। इस दिन (ज्येष्ठ
मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि) 10 महाविद्याओ का
पूजन किया जाता है. माँ धूमावती की सवारी कौवा है और ये श्वेत वस्त्र (कपड़े) धारण करती हैं तथा अपने केश (बाल) खुले रखती हैं.
धार्मिक मान्यताओ के अनुसार इनके दर्शन मात्र से ही अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है (यानि ज्यादा लाभ होता है ). इनका अवतरण (अवतार) पापी लोगो को दंड देने के लिए हुआ था. माता
धूमावती की पूजा करने मात्र से ही सभी विपत्तियों से मुक्ति मिलती है, सभी
तरह के रोगो का नाश होता है और युद्ध में भी विजय की
प्राप्ति होती है. अगर आपके जीवन में भी यदि किसी भी प्रकार का बड़ा संकट हो तो,
उसे दूर करने के लिए माँ धूमावती जयंती
के दिन इन विशिष्ट चीजों से हवन करें धार्मिक
मान्यताओ के अनुसार ऐसा करने मात्र
से आपके सभी रोग और दुख दर्द दूर हो जाते है और आपका जीवन सुखी हो जाएगा
हवन कैसे करे
1 1. यदि आप पर बहुत अधिक कर्जवान है और उससे मुक्ति नहीं मिल रही है,
तो
आपको नीम की पत्तियों सहित घी से हवन करें.
2. किसी भी
प्रकार के पुराने रोग और बड़े
संकट से छुटकारा पाने के
लिए मीठी रोटी व घी से हवन करें.
3. गरीबी से निजात (छुटकारा) पाने के लिए गुड़ व गन्ने से हवन
करें.
4. काल सर्प दोष और क्रूर ग्रह के दोष से मुक्ति
पाने के लिए जटामांसी
और कालीमिर्च से हवन करें.
5. अगर आपके
घर मे कोई व्यक्ति जेल मे फंसा हुआ है तो मुक्त
कराने के लिए काली मिर्च से हवन करें.
6. सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रक्तचंदन ( रक्तचंदन 8 से 11 मीटर तक ऊँचा, मध्यमाकारीय,
सघन
शाखा-प्रशाखायुक्त, पर्णपाती वृक्ष (पेड़) होता है।) घिस कर शहद में मिलाएं और फिर इसमें जौ मिलाकर हवन करें.
माँ धूमावती
मंत्र
1. 1. ॐ धूं धूं धूमावत्यै फट्
2. 2. ॐ धूमावत्यै विद्महे संहारिण्यै धीमहि
तन्नो धूमा प्रचोदयात
3. 3. धूम्रा मतिव सतिव पूर्णात सा सायुग्मे,
सौभाग्यदात्री
सदैव करुणामयि:
4. 4. धूं धूं धूमावती ठ: ठ:


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